घुटन भरे माहौल में श्वास कल रात मराठी की बेहद मर्मस्पर्शी फिल्म "श्वास" देखी - बहुत दिनों बाद कोई मराठी फिल्म देखी। यह फिल्म मैंने दोबारा देखी, पहली बार तब देखी थी भारत की तरफ से 2004 में ऑस्कर के लिए नामित किया गया था.... इसका डी वी डी नागपुर से मंगा कर देखी थी।वास्तविक घटना पर आधारित यह फिल्म माधवी घरपुरे की कहानी पर बनी है जिसे संदीप सावंत ने निर्देशित किया है - बेहद सजीव अभिनय,सुंदर स्थलों पर की गई नयनाभिराम फोटोग्राफी और बेहद प्रभावशाली पार्श्व संगीत फ़िल्म के प्रभाव को बढ़ाते हैं। कोरो ना की वजह से जिस तरह की घरेलू कैद में हम लोग बंद हैं और बाहर की दुनिया से सिवाय टीवी या सोशल मीडिया के हमारा संपर्क टूटा हुआ है, तब यह फिल्म देखना खुली हवा में सांस लेने जैसा था - सिर्फ शाब्दिक अर्थों में नहीं बल्कि दृश्यात्मक और गतिमान अर्थों में। नदी पहाड़ जंगल इंसान पेड़ पौधे पशु पक्षी इन सब के साथ सहज भाव से मिलना जुलना कितना आह्लादकारी था यह शब्दों में बयान करना मुश्किल है। फिल्म एक छोटे बच्चे और उसके नाना के बेहद आत्मीय संबंधों पर आधारित है। बच्चे की आंख में कुछ स...