बचपन से मैं पेंटर बनना चाहता था लेकिन जीवन की दिशा कुछ ऐसी उलट-पुलट हुई और बदली कि मैं पेंटिंग छोड़ फिल्में बनाने लगा।मैंने अपना कैरियर बदला तो तब तक बनाए अपने सारे चित्र आग के हवाले कर दिए। मैं पेंटिंग को पूरी तरह से भूल जाना चाहता था, उसका नाम भी नहीं सुनने को तैयार था। एक लोकप्रिय जापानी कहावत है कि दो खरगोशों के पीछे एक साथ भागोगे तो दो क्या एक खरगोश भी हाथ नहीं आएगा। फिल्में बनाने के बाद मैंने पेंटिंग की तरफ देखा भी नहीं। लेकिन बतौर निर्देशक यह महसूस हुआ कि अपनी टीम के लोगों को मैं क्या चाहता हूं यह समझाने के लिए रफ स्केच करके दिया जाए तो उपयोगी होगा।

                                                                                                -- अकीरा कुरोसावा
                                                                                        विख्यात जापानी फ़िल्म निर्देशक

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